हद से बड़ी उड़ान की ख्वाहिश तो यूँ लगा

जैसे कोई परों को कतरता चला गया |

मंज़िल समझ के बैठ गये जिनको चंद लोग

मैं एैसे रास्तों से गुज़रता चला गया ||